Thursday, January 27, 2011

MY POEM


मै और मेरी तन्हाई अक्सर ये बाते करते हें ...
मै कहेती हूँ तुम भीड़ में कहाँ गुम हो जाती हो ?  
वो कहेती हें तुम तन्हाई में ही क्यों आंसू बहाती हो ?? 
मै कहेती हूँ तुम तन्हाई में ही क्यों चली आती हो
वो कहेती हें तुम भीड़ में मुझे भूल जाती हो .. 
मै कहेती हूँ तुम्हारी आंसू की हर बूंद मेरी सखी बनती हें.. 
वो कहेती हें तुम्हारी आँखों से निकल कर ये दुनिया मुझे दिखाती हें .. 
मै और मेरी तन्हाई के आंसू अक्सर ये बाते करते हें !!!